राजस्थान में 1857 की क्रांति — Rajasthan adhyayan class 9 book notes pdf

राजस्थान में 1857 की क्रांति एवं प्रमुख क्रांतिकारी — RBSE Class 9 Rajasthan Adhyayan Notes PDF

RBSE Class 9 Rajasthan Adhyayan में राजस्थान के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्याय दिए गए हैं। इनमें 1857 की क्रांति एवं राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी का विषय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। राजस्थान में 1857 की क्रांति का प्रभाव अलग-अलग रियासतों और सैनिक छावनियों में देखने को मिला। कहीं सैनिकों ने अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह किया, तो कहीं स्थानीय क्रांतिकारियों और जागीरदारों ने उनका साथ दिया। इसी आर्टिकल में सबसे नीचे हमने इसके हस्तलिखित नोट्स की लिंक भी  दल रखी  हैं आप उसे भी आसान डाउनलोड कर सकते हो |

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राजस्थान में 1857 की क्रांति : पृष्ठभूमि

राजस्थान में अंग्रेजों का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ा। मराठों से सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण राजस्थान की अनेक रियासतों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधियाँ कीं। 1817 से 1823 के बीच कई राजपूत शासकों ने अंग्रेजों के साथ संधियाँ कीं। उस समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड हेस्टिंग्स थे और राजपूताना में संधियों पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख अंग्रेज अधिकारी चार्ल्स मेटकाफ थे।

1857 के समय राजस्थान में विभिन्न रियासतों के लिए ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट नियुक्त थे। कोटा में मेजर बर्टन, जोधपुर में मैक मेसन, भरतपुर में मॉरिसन, जयपुर में ईडन, उदयपुर में शावर्स और सिरोही में जे. डी. हॉल राजनीतिक एजेंट ( PA) के रूप में कार्य कर रहे थे। इसी समय विभिन्न रियासतों के अपने-अपने शासक भी थे।

  • 1857 के समय राजस्थान की प्रमुख सैनिक छावनियाँ
  • 1857 के समय राजस्थान में प्रमुख रूप से छह सैनिक छावनियाँ थीं—

  1.  नसीराबाद — अजमेर
  2.  नीमच
  3. एरिनपुरा — पाली
  4. देवली — टोंक
  5. ब्यावर — अजमेर
  6.  खेरवाड़ा — उदयपुर

इनमें नसीराबाद, नीमच, एरिनपुरा और देवली में विद्रोह हुआ, जबकि ब्यावर और खेरवाड़ा में विद्रोह नहीं हुआ।

नसीराबाद में 1857 की क्रांति | NASIRABAD ME 1857 KI KRANTI

राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत नसीराबाद छावनी से मानी जाती है। यहाँ क्रांति 28 मई 1857 को हुई। नसीराबाद की विद्रोही टुकड़ी 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री थी।

विद्रोह के दौरान अंग्रेज अधिकारी मेजर स्पॉटिसवुड और कर्नल न्यूबरी की हत्या कर दी गई, जबकि लेफ्टिनेंट लॉक और कप्तान हार्डी घायल हुए। इसके बाद विद्रोही सैनिक दिल्ली की ओर रवाना हो गए और 18 जून को दिल्ली पहुँचे।

इस घटना को राजस्थान में 1857 की क्रांति के आरंभ से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए नसीराबाद की क्रांति Rajasthan GK और Rajasthan History के महत्वपूर्ण topics में शामिल है।

नीमच में 1857 क्रांति | NEEMACHA ME 1857 KI KRANTI 

नसीराबाद के बाद नीमच छावनी में भी विद्रोह हुआ। नीमच में क्रांति की तिथि 3 जून 1857 थी।

नीमच से विद्रोही सैनिक शाहपुरा, निम्बाहेड़ा, देवली और आगरा होते हुए दिल्ली की ओर बढ़े। शाहपुरा के शासक ने उन्हें रसद उपलब्ध कराई। बाद में कप्तान शावर्स ने कोटा, बूंदी और मेवाड़ की राजकीय सेनाओं की सहायता से 8 जून 1857 को नीमच पर पुनः अधिकार कर लिया।

एरिनपुरा एवं आउवा की 1857 क्रांति

राजस्थान की 1857 की क्रांति में एरिनपुरा और आउवा का विशेष महत्व रहा। एरिनपुरा में क्रांति की शुरुआत 21 अगस्त 1857 को जोधपुर लीजन के सैनिकों द्वारा हुई।

विद्रोहियों का नारा था—

“चलो दिल्ली, मारो फिरंगी।”

आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह ने क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया। आउवा और जोधपुर की संयुक्त सेना का अंग्रेजों के साथ संघर्ष हुआ।

बिठोड़ा का युद्ध 1857

8 सितंबर 1857 को विठोड़ा का युद्ध हुआ। इसमें आउवा और जोधपुर की संयुक्त सेना ने संघर्ष किया और जोधपुर का किलेदार अनार सिंह मारा गया।

चेलावास का युद्ध 1857

इसके बाद 18 सितंबर 1857 को चेलावास का युद्ध हुआ। इस युद्ध में ए. जी. जी. जॉर्ज लॉरेंस को पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद जोधपुर के राजनीतिक एजेंट मैक मेसन का सिर काटकर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया गया। इसी युद्ध को काले व गोरो का युद्ध भी कहा जाता हैं|

अंततः 20 जनवरी 1858 को ब्रिगेडियर होम्स ने आउवा पर अधिकार कर लिया और दमन की कार्रवाई की। आउवा के मंदिरों और मूर्तियों को भी नष्ट कर दिया गया।

कोटा में 1857 की क्रांति

कोटा की क्रांति को 1857 के विद्रोह की सबसे सुनियोजित और भीषण घटनाओं में से एक माना गया है। यहाँ क्रांति 15 अक्टूबर 1857 को हुई।

इस क्रांति का नेतृत्व जयदयाल और मेहराब खाँ ने किया। क्रांतिकारियों ने मेजर बर्टन और उसके दो पुत्रों की हत्या कर दी। इसके बाद महाराव रामसिंह को महल में कैद कर लिया गया और उनसे नौ शर्तों वाले संधि-पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गए।

लगभग छह महीने तक कोटा पर क्रांतिकारियों का कब्जा रहा। मार्च 1858 में मेजर जनरल रॉबर्ट्स ने करौली रियासत की सहायता से कोटा को मुक्त कराया। इसके बाद जयदयाल को तोप से उड़ा दिया गया।

सलूम्बर और कोठारिया का योगदान

मेवाड़ के महाराणा स्वरूप सिंह ने अंग्रेजों का साथ दिया। इसके विपरीत सलूम्बर के रावत केसरी सिंह और कोठारिया के रावत जोधसिंह ने क्रांतिकारियों का खुलकर समर्थन किया।

नोट- रावत जोधसिंह ने ठाकुर कुशाल सिंह और तांत्या टोपे को शरण भी दी।

1857 की क्रांति की असफलता के कारण

राजस्थान में 1857 की क्रांति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। इसके पीछे कई कारण रहे—

  1. - अधिकांश देशी राजाओं ने अंग्रेजों का साथ दिया।
  2. - क्रांतिकारियों में केंद्रीय संगठन और एकता का अभाव था।
  3. - कुशल और प्रभावी नेतृत्व की कमी रही।
  4. - मारवाड़, मेवाड़ और जयपुर नरेशों ने तांत्या टोपे का सहयोग नहीं किया।

इस प्रकार राजस्थान में क्रांति का प्रभाव व्यापक होने के बावजूद सभी रियासतों और शासकों का एक समान सहयोग नहीं मिल सका।

1857 की क्रांति में जन-जागृति में साहित्यकारों का योगदान

राजस्थान में जन-जागृति की भावना को मजबूत करने में साहित्यकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • कविराजा बांकीदास जोधपुर के नरेश मानसिंह के राजकवि थे। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध लोगों में चेतना पैदा करने वाली रचनाएँ लिखीं।
  • महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण बूंदी के प्रसिद्ध कवि थे। उनकी महत्वपूर्ण कृति ‘वीर सतसई’ मानी जाती है, जिसमें शौर्य और संघर्ष की भावना दिखाई देती है।

राजस्थान के प्रारंभिक क्रांतिकारी

राजस्थान के प्रारंभिक क्रांतिकारियों में डूंगजी-जवाहरजी (सीकर) का नाम महत्वपूर्ण है। वे शेखावाटी ब्रिगेड में रिसालदार थे और गरीबों की सहायता के लिए अमीरों को लूटकर धन गरीबों में बाँटते थे। 1847 ई. में उन्होंने नसीराबाद छावनी को लूटा। उनके प्रमुख सहयोगियों में लोटजी निवारवाल और करणा मीणा का नाम दिया गया है।

अमरचंद बांठिया का संबंध बीकानेर/ग्वालियर से बताया गया है। उन्हें 1857 के संग्राम राजस्थान का प्रथम शहीद बताया गया है, जिन्हें 1857 के संग्राम में अंग्रेजों द्वारा फाँसी दी गई।


परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

Rajasthan GK Notes में 1857 की क्रांति से जुड़े ये तथ्य विशेष रूप से याद रखें—

  • - राजस्थान में 1857 की क्रांति का प्रमुख प्रारंभिक केंद्र — नसीराबाद
  • - नसीराबाद में क्रांति — 28 मई 1857
  • - नसीराबाद की विद्रोही टुकड़ी — 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री
  • - नीमच में क्रांति — 3 जून 1857
  • - एरिनपुरा में क्रांति — 21 अगस्त 1857
  • - आउवा के क्रांतिकारी नेता — ठाकुर कुशाल सिंह
  • - कोटा में क्रांति — 15 अक्टूबर 1857
  • - कोटा क्रांति के प्रमुख नेता — जयदयाल और मेहराब खाँ
  • - चेलावास का युद्ध — 18 सितंबर 1857
  • - आउवा पर अंग्रेजों का अधिकार — 20 जनवरी 1858
  • - डूंगजी-जवाहरजी — सीकर क्षेत्र के प्रारंभिक क्रांतिकारी
  • - राजस्थान का प्रथम शहीद — अमरचंद बांठिया

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